जीवन पर बेहतरीन हिंदी कविताएं | 2 Best Hindi Poems on Life Values


Hindi Poems on Life Values (जीवन पर हिंदी कविताएं) : हेलो दोस्तों! इस लेख में हम 2 हिंदी कविता Life से संबंधित आपके साथ शेयर कर रहे है आशा करता हूं ये "hindi poems on life values" आपको पसंद आएंगी. यदि आप कविताओं से संबंधित सवाल पूछना चाहते हैं तो कमेंट के माध्यम से पूछ सकते हैं.

जीवन पर बेहतरीन हिंदी कविताएं - Hindi Poems on Life Values 

Hindi Poems on Life Values

1 : बाप का प्यार (Heart Touching Hindi Poem on Life Values)

नन्ही सी आंखें और मुड़ी हुई उंगलियां थी
ये बात तब की है जब दुनिया मेरे लिए सोई हुई थी।
नन्हे से शरीर पर कपड़ा पहनाता था वो
ईद-वीद की समझ ना थी फिर भी मेरे साथ मनाता था।
घर में खाने के बांदे थे पर FD में पैसा जोड़ रहा था
उसके सपने अधूरे थे पर मेरे लिए बुन रहा था।
यह बात तब की है जब दुनिया मेरे लिए सोई हुई थी।


वक्त कटा साल कटा पर तब भी सब अनजान था
लेकिन मैं फिर भी उसकी जान था।
बिस्तर को गीला करना हो या फिर रातों का रोना था
एक बाप ही था जिससे छीना मैंने सोना था।
सुबह फजल तक गोदी में खिलाता झूलों में झुलाता
फिर दिन में काम पर जाता शाम को चला आता
कभी खुद से परेशान कभी दुनिया का सताया था
एक बाप ही था जिसने मुझे रोते हुए हंसाया था।

अल्फाजों से तो गूगा था मैं
पर वो मेरे इशारे समझ रहा था।
पर इस बात से हैरान हुआ में
कि वह मुझे किस तरह पढ़ रहा था।
अब्बा तो छोड़ो यार अभी आ भी नहीं निकला था
वह मेरी हर फरमाइश को पूरा कर रहा था।

मैं भी अब उस के लाड प्यार में ढलने लगा था
घर से निकल ना जाए,
अब उसके कदमों पर नजरें रखने लगा था।
मुद्दे तो हजार थे बाजार में उसके पास,
लेकिन कब ढल जाएगा सूरज उसको इसका इंतजार था।
मैं दरवाजे की चौखट को ताकता रहता था,
जब होती थी दस्तक तो वॉकर से झांकता रहता था।

देख मैं उसकी शक्ल दूर से चिल्लाता था,
जो भी इसारे मुझे आते थे उनसे मैं उसे करीब बुलाता था।
वो भी छोड़ छाड़ कर सब कुछ मुझे सीने से लगाता था।
 कभी हवा में उछलता था तो कभी करतब दिखाता था।
मेरी एक मुस्कान के लिए कभी हाथी कभी घोड़ा बन जाता था।
मैं सो सकूं रात भर सुकून के साथ इसीलिए पूरी रात एक करवट में गुजारता था।


पर वो बचपन अब शायद सो चुका था,
और मैं जवानी की दहलीज में अब कदम रखने लगा था।
उसी कुर्बानी को उसका फर्ज समझने लगा था।

चाहे वो खुद बिना पंखे के सोना हो या मुझे हवा में सुलाना
या फिर वो ईद का पुराना कपड़ा पहनना हो और मुझे नया पहनाना..!
या फिर तपते हुए बुखार में मेरे माथे पर रखी हुई ठंडी पट्टियां हो..!
या फिर मेरी हर जिद के आगे झुक जाना..!

वो बचपन था जो गुजर गया,
वो रिश्ता था जो सिकुड़ गया।
मैं उस कुर्बानी के बोझ को उठा न पाया,
इसीलिए उसे शहर में कहीं दूर छोड़ आया।
नया शहर था..
और नए शहर की हवा मुझ पर चढ़ने लगी थी।
बाप की हर नसीहत मुझे बचपना लगने लगी थी।
काम जो मिल गया था, पैसा जो आने लगा था।

क्या जरूरत है बापकी यह सोच मुझ में पलने लगी थी।
उधर मेरा बाप बेचैन था मेरी याद में,
कि कुछ रोज तो घर आ जा बेटा बस यही था उसकी फरियाद में।
और मैं उस से हिसाब लेने लगा था,
जो दुनिया का कर्जदार बन चुका था।
क्या जरूरत है तुम्हें इतने पैसे कि अब यह सवाल करने लगा था।


अब घड़ी का कांटा फिर से पलट चुका था,
कल तक मैं किसी का बेटा था आज किसी का बाप बन चुका था।
और हसरतों के स्वेटर में भी बुनने लगा था,
कल क्या करेगा मेरा बेटा मैं भी यही सोचने लगा था।
दुनिया में ना उससे कोई आगे था ना कोई अपना था,
सब पराया था बस वही एक सपना था।
अब मुझ में एक जज़्बात उमड़ने लगा था,
जिस जज्बात से में हमेशा अनजान था कि कल क्या गुजरी होगी मेरे बाप पर
यह मुझे समझ आने लगा था।

वेलोज मोहब्बत की मूरत होता है बाप।
जो लफ्जों में ना बुना जाए जो कलम से ना लिखा जाए, वो होता है बाप।
जो रोते हुए को हंसा दे और खुद को माजूर बनाकर तुम्हें खड़ा कर दे, वो होता है बाप।

एक रोज तुम्हें एहसास जरूर होगा
मसरूफ तुम थे उम्र दरार वो होगा।
जिसकी उंगली का सहारा पकड़ कर चलते थे,
आज वही छड़ी का तलबदार होगा।
और जिसके सबके में जी रहे हो आज
कल वो ना रहे तो क्या होगा।

पर अभी वक्त बचा कुछ खास तुम्हारे पास है
तब तक जब तक बाप का साया तुम्हारे साथ है।
और जन्नत के तलबगार हो तो सीने से लगा लेना क्योंकि वही कल जन्नत का सरदार होगा।
सब गिले-शिकवे मिटाकर चिपक जाना उसको
क्योंकि आज तो बाप है, पर कल बाप तुम्हारे साथ न होगा।

2 : जिंदगी पर हिंदी कविता (Hindi Poems on Life Values)

Hindi Poems on Life Values

क्या खूब लिखा है किसी ने,
बख्श देता है खुदा उनको जिनकी किस्मत ख़राब होती है,
वो हरगिज़ नहीं बख्शे जाते है जिनकी नियत ख़राब होती है..!!

न मेरा एक होगा न तेरा लाख होगा,
न तारीफ तेरी होगी न मज़ाक मेरा होगा,
गरूर न कर शाही शरीर का,
मेरा भी खाक होगा तेरा भी खाक होगा..!

ज़िंदगी भर ब्रांडेड ब्रांडेड करने वालो,
याद रखना कफ़न का कोई ब्रांड नहीं होता..!!
कोई रो कर दिल बहलाता है,
और कोई हंस के दर्द छुपता है,
क्या करामात है कुदरत का जिन्दा इंसान पानी में डूब जाता है,
और मुर्दा तैरकर दिखता है..!!

मौत को देखा तो नहीं पर शायद वो बहुत खूबसूरत होगी,
कम्ब्खत जो भी उससे मिलता है जीना छोड़ देता है..!!
गजब की एकता देखी लोगो की ज़माने में,
जिन्दों को गिराने में और मुर्दों को उठाने में..!!

ज़िन्दगी में न जाने कौनसी बात आखरी होगी,
न जाने कौनसी रात आखरी होगी,
मिलते झूलते बातें करते रहो यारों एक दूसरें से,
न जाने कौनसी मुलाकात आखरी होगी..??


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