चालाक बिल्ली का न्याय, Hindi Story with Moral For Class 1


Hindi Story For Class 1 With Moral : दोस्तों, हम आपके साथ एक प्रेरणादायक और शिक्षाप्रद हिंदी कहानी ( Hindi Stories with moral ) साझा करेंगे. यह Hindi Kahani बच्चों के लिए काफी शिक्षाप्रद और मजेदार साबित होगी. इस ब्लॉग पर पंचतंत्र की हिंदी कहानियां और Moral Stories in Hindi मैं लिखने का एकमात्र मकसद आपको मनोरंजन के साथ कुछ अच्छी शिक्षा देने की एक पहल है. आज की हमारी कहानी का शीर्षक है "चालाक बिल्ली का न्याय".

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चालाक बिल्ली का न्याय, Hindi Story with Moral For Class 1 (हिंदी कहानी)

Moral Story in Hindi For Class 1

एक चिड़िया बड़े मजे से एक पेड़ पर घोंसला बना कर रहती थी. उसकी जिंदगी बड़े मज़े में बीत रही थी. एक दिन चिड़िया अपना दाना खोजते-खोजते दूर तक निकल गई. तभी उसे अचानक से एक अनाज का अधपका खेत दिखाई दिया. चिड़िया यह सोचकर बहुत खुश थी कि उसे इतनी दूर आने का अच्छा फल अनाज के खेत के रूप में मिल गया है.

 चिड़िया वहां मजे से अनाज खाकर अपनी दिन बिताने लगी. लेकिन जैसे-जैसे अनाज पका किसानों ने अनाज की फसल काटना शुरू कर दी और धीरे-धीरे पूरा खेत खाली हो गया. अब वहां खाने के लिए कुछ नहीं बचा था.

 तब तक दूसरी तरफ एक कबूतर ने चिड़िया के घोसले को खाली देख कर उसके घोसले में अपना डेरा जमा लिया और मस्त रहने लग गया. चिड़िया ने वहां अनाज के खेत खाली हो जाने पर,  वापस अपने घोंसले में आने का फैसला किया. लेकिन जब चिड़िया वापस लौट कर आई तो उसने अपने घोंसले पर कबूतर को पाया.

 चिड़िया ने कबूतर को देख गुस्सा दिखाते हुए कहा-- "चोर कहीं के!! ये घोंसला मेरा है, निकल मेरे घोंसले. से कुछ दिन के लिए मैं बाहर क्या चली गई, तुमने तो मेरे घोसले पर ही कब्जा कर लिया".


कबूतर चिड़िया की कठोर वाणी सुनकर आग बबूला हो उठा. कबूतर ने गुस्साते हुए कहा-- "अरे ओ मूर्ख चिड़िया!! तालाब, खेत और घर कभी खाली छोड़कर नहीं जाना चाहिए. अन्यथा छोड़कर जाने वाला अपना अधिकार इन चीजों से खो देता है. अब इस घोसले पर मेरा अधिकार है और मैं इसे छोड़कर नहीं जा सकता.

कबूतर की यह बात सुनकर चिड़िया बोली-- "ऐसे बहस करने से कुछ साबित नहीं होगा. हमें किसी ज्ञानी पंडित से सलाह लेनी चाहिए और सलाह के दौरान जिस के हक में फैसला होगा, वह इस घोसले में रहेगा".

कबूतर को चिड़िया का सुझाव पसंद आया. लेकिन समस्या यह थी कि वह अपना न्याय किस से करवाएं? तभी उन्हें पास की नदी में नहाते हुए एक बिल्ली दिखाई दी. जो धर्म पाठ आदि करने में व्यस्त थी. चिड़िया और कबूतर ने उसी से अपना फैसला करवाने का निर्णय लिया.

 लेकिन बिल्ली इन दोनों जातियों की जन्मजात शत्रु होती है. लेकिन फिर भी दोनों ने सावधानी बरतते हुए बिल्ली को अपनी समस्या सुनाई और कहा-- "आप अपना न्याय पूर्ण फैसला सुनाए और जो दोषी साबित हो उसे खा जाएं".

बिल्ली बहुत चालाक थी. बिल्ली ने कहा-- "अरे!! यह तुम कैसी बात कर रहे हो, मैं शाकाहारी बिल्ली हूं. मुझे पता है 'हिंसा' करना पाप है, और मैं नरक में नहीं जाना चाहती. तुम्हारे न्याय की बात है तो मैं तुम्हारा न्याय कर दूंगी, लेकिन किसी जीव की हत्या, यह मेरे से ना हो पाएगा.

बिल्ली की यह बात सुनकर चिड़िया और कबूतर बिल्ली के झांसे में आ गये और बिल्ली के करीब जा पहुंचे. जैसे ही दोनों बिल्ली के अति शीघ्र पहुंचे, बिल्ली उन पर बाज की तरह टूट पड़ी और दोनों का काम तमाम कर दिया. अपने शत्रु पर विश्वास करने की वजह से चिड़िया और कबूतर को अपने प्राण गंवाने पड़े. | Hindi moral Story
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Moral Of the Story in Hindi –

 इस कहानी से हमें शिक्षा मिलती है कि- अपने शत्रुओं से संभलकर अथवा दूर रहने में ही भलाई है.

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