समझदार कछुआ, Hindi Stories With Moral For Class 3, 2


 Hindi Stories With Moral For Class 3, 2, 1 :दोस्तों हम आपके साथ 2 हिंदी कहानियाँ  Hindi Stories with moral 1. समझदार कछुआ Hindi story  2. कौए की चतुराई Hindi kahani. आदि Hindi story share कर रहे है. ये हिंदी कहानी
 Hindi Kahaniya आपको अपने लक्ष्य की तरफ ले जाने में मदद करेंगी. हम आशा करते हैं "Hindi moral Stories" पसंद आएंगी.

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Hindi Stories with moral ( हिंदी कहानी )

Hindi Stories with moral

1. Smart turtle Hindi Story (समझदार कछुआ)

बहुत पहले की बात है, एक बार एक प्रांत में बारिश नहीं हुई, हर जगह सूखा पड़ गया. सभी छोटे नाले और तालाब सूख रहे थे. इन्हीं छोटे तालाब में एक कछुआ रहता था. जैसे-जैसे छोटे तालाबों का पानी सूख रहा था, वैसे-वैसे कछुए को अपने अस्तित्व की चिंता सता रही थी. लेकिन कछुआ काफी बहादुर था. उसने छोटे तालाबों से निकलकर कुछ दूरी पर स्थित बड़े तालाब में जाने का निश्चय किया.

 बड़े तालाब में पानी की कोई कमी नहीं थी. वह बहुत विशाल था और हमेशा पानी से भरा हुआ रहता था. लेकिन परेशानी यह थी कि छोटे तालाब से बड़े तालाब तक जाने वाले रास्ते में एक जंगल पड़ता था. इस जंगल में कई छोटे बड़े जंगली जानवर रहा करते थे. लेकिन कछुआ बहादुर था, उसने हिम्मत न हारते हुए बड़े तालाब में जाने का दृढ़ संकल्प किया.

 दूसरे दिन की सुबह होते ही वह अपने लक्ष्य की तरफ निकल पड़ा. रास्ते में उसे एक भेड़िया मिला. भेड़िये ने जब कछुए को देखा तो उसके मुंह में पानी आ गया. उसने कछुए से कहा-- "सुना है! तुम बहुत अच्छा गाते हो, मुझे कोई गीत सुनाओ नहीं तो मैं तुम्हें खा जाऊंगा."

कछुआ कुछ समय के लिए तो डरा लेकिन वह बहुत बुद्धिमान था. उसने भेड़िए से कहा-- "भेड़िए भाई! मुझे खाने में तुम्हारा कोई फायदा नहीं है. मेरी कठोर खाल तुम्हारे गले में फंस जाएगी. तुम मुसीबत में पड़ जाओगे और तुम्हारी मृत्यु भी हो सकती है.


कछुए की यह बात सुनकर भेड़िया सोच में पड़ गया. कुछ देर सोच विचार करने के बाद भेड़िए ने कछुए से कहा-- "अगर तुम मुझे गीत नहीं सुनाओगे तो मैं तुम्हें पास वाले बड़े तालाब में फेंक दूंगा". भेड़िए की यह बात सुनकर कछुआ मन ही मन मुस्कुराया और फिर डरने का झूठा नाटक करते हुए बोला-- "अरे भेड़िए भाई! ऐसा मत करना नहीं तो मैं पानी में डूब कर मर जाऊंगा".

कछुए को डरा सहमा समझकर भेड़िया खुश हुआ और उसने कछुए को पकड़कर पास वाले बड़े तालाब में फेंक दिया. गहरे ठंडे पानी में पहुंचते ही कछुए ने चैन की सांस ली और खुशी से झूम उठा. कछुआ तैरते हुए बीच तालाब में पहुंच गया और अपनी मुंडी निकालकर भेड़िए से बोला-- "भेड़िए भाई! मुझे मेरे मन मुताबिक घर तक पहुंचाने के लिए तुम्हारा बहुत-बहुत धन्यवाद".

भेड़िए ने जब यह बात सुनी तब उसे अपनी भूल का पता चला. लेकिन अब वह क्या कर सकता था, कछुआ गहरे पानी में पहुंच चुका था. भेड़िया पछताते हुए अपने घर वापस लौट गया.

Moral Of the Story in Hindi –

इस कहानी से हमें शिक्षा मिलती है कि संकट के समय धैर्य और बुद्धिमता से बड़ी से बड़ी कठिनाई को भी मात दी जा सकती है, इसीलिए कठिन समय में बुद्धि और धैर्य का प्रयोग करें.



2. Crow's Cleverness Hindi Moral Story (कौए की चतुराई)

एक बार जंगल में एक शेर को अपना शिकार तलाशते हुए 2 दिन बीत गए. उसे अपना शिकार नहीं मिल रहा था. शेर भूख से तड़प रहा था. उसे शिकार ढूंढते-ढूंढते प्यास भी लगने लगी थी. वह पास के झरने पर पानी पीने के लिए गया, वहां उसे एक हिरण पानी पीते हुए दिखाई दिया. शेर ने जब हिरण को देखा तो उसकी जान में जान आई और इससे पहले कि हिरण वहां से भागता वह उस पर टूट पड़ा और उसे वही मार दिया.

 शेर बहुत भूखा था. इसीलिए जल्दबाजी में हिरण को खाते समय उसके गले में हिरण की हड्डी अटक गई. शेर ने गले से हड्डी निकालने की लाख कोशिश की, लेकिन वह असफल रहा. धीरे-धीरे दिन बीतने लगे. शेर बहुत कमजोर हो गया. उसने पूरे जंगल में घोषणा करवा दी कि जो उसके गले से इस हड्डी को निकालेगा, वह उसे मुंह मांगा इनाम देगा. इतनी बड़ी घोषणा के बाद भी शेर की सहायता करने के लिए कोई नहीं आया.

 यह बात कौए को पता चली. शेर को किसी भी प्रकार की सहायता ना मिलती देख कौए को शेर पर दया आ गई. कौए ने जंगल के सभी जानवरों से शेर के गले की हड्डी निकालने के लिए अनुरोध किया. लेकिन कोई अपनी जान को जोखिम में नहीं डालना चाहता था. अतः कौए ने स्वयं शेर के गले से अटकी हुई हड्डी निकालने का निश्चय किया.

 लेकिन कौआ अपनी सुरक्षा को लेकर भी काफी सतर्क था. कौए ने शेर की गले की हड्डी निकालने से पहले उसके मुंह में दो मोटी लकड़ी फसा दी, जिससे शेर चाहकर भी उसे खा न सके. उसके बाद कौए ने शेर के गले में फंसी हड्डी निकाल दी और तुरंत उड़ कर पेड़ पर जा बैठा. शेर कौए से प्रसन्न हुआ और उसे धन्यवाद बोलकर चला गया.

Moral Of the Story –

इस कहानी से हमें शिक्षा मिलती है कि- जब ताकतवर शत्रु की सहायता की जाए तो स्वयं की रक्षा के उपाय पहले कर लेनी चाहिए.

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