"पेड़ बन जाओ" बच्चों की कहानी | Bachho Ki Kahani in Hindi


Bachho Ki Kahani in Hindi : हलो दोस्तो! आज इस लेख के माध्यम से हम "बच्चों की हिंदी कहानी" आप लोगों के साथ शेयर करेंगे. इस "हिंदी कहानी" से आप मनोरंजन के साथ कुछ नई सीख पा सकते हैं. इस "Bachho Ki Hindi Kahani" का शीर्षक है 'पेड़ बन जाओ' अगर आपको भी "बच्चों की हिंदी कहानियां (Bachho Ki Hindi Kahaniyan)" पसंद है, तो आप हमारे ब्लॉग पर विजिट करते रहिएगा. हम इस ब्लॉग पर अक्सर बेहतरीन हिंदी कहानियां शेयर करते रहते हैं.

"पेड़ बन जाओ" बच्चों की कहानी - Bachho Ki Kahani in Hindi

Bachho Ki Hindi kahani

काशी के विश्वनाथ मंदिर में भरत मुनि नाम के परम सिद्ध महात्मा रहते थे. एक दिन उन्हें तपोवन सीमा में स्थित देवताओं के दर्शन की इच्छा हुई. वह सुबह दर्शन को निकल गए.

 दोपहर में उन्हें थकान का अनुभव हुआ. पास ही बेर के दो वृक्ष थे. उन्हीं की छाया में वह विश्राम करने लगे. एक वृक्ष के नीचे उन्होंने सिर रखा और दूसरे की जड़ में पैर रख दिए. थोड़ी देर विश्राम के बाद तपस्वी वहां से चले गए. बेर के दोनों वृक्ष एक सप्ताह के भीतर सूख गए.

सूखने के बाद दोनों वृक्षों ने एक ब्राह्मण के घर दो कन्याओं के रूप में जन्म लिया. जन्म के कुछ वर्ष बाद भरतमुनि ब्राह्मण के घर के सामने से गुजर रहे थे. उन्हें देखते ही दोनों लड़कियां उनके चरणों में गिर गई. और बोली-- "महात्मा जी! आपकी कृपा से हमारा उद्धार हुआ है. हमने आपकी वजह से पेड़ का जीवन त्याग मनुष्य देह प्राप्त की है."

भरतमुनि की समझ में कुछ नहीं आ रहा था. उन्होंने विस्मय से पूछा-- "पुत्रियों मैंने कब किस तरह तुम पर कृपा की. मुझे तो इस विषय में कुछ नहीं पता है."

यह सुन दोनों लड़कियों ने कहा-- "पहले हम दोनों देवराज इंद्र की अप्सराएं थी. गोदावरी नदी के तट पर छिन्नपाप नामक पवित्र तीर्थ है. वहां गिरधारी मुनि कठोर तपस्या कर रहे थे. इंद्र उनकी तपस्या से डर गए और उन्हें यह डर सताने लगा की कहीं उनका सिंहासन न छिन जाए. हमें आदेश दिया कि मुनि की तपस्या में विघ्न डालो."

बस हम दोनों वहां जाकर नृत्य करने लगी. इससे मुनि का ध्यान भंग हो गया. वह क्रोधित हो उठे उन्होंने श्राप दिया कि- 'तुम दोनों पेड़ बन जाओ'. इस पर हमने उनके पैर पकड़ लिए और क्षमा मांगने लगी."

महात्मा जी! का हृदय पसीज गया. उन्होंने कहा-- "मैं तुम्हें श्राप मुक्ति का रास्ता बता सकता हूं. उन्होंने बताया कि श्राप भरतमुनि के आने तक ही रहेगा. उसके बाद तुम नारी के रूप में जन्म लोगी और बाद में देवलोक जा सकोगी." लड़कियों की बात सुनकर भरतमुनि ने उन्हें आशीर्वाद दिया और अपनी राह चले गए. दोनों कन्याएं कुछ समय बाद देवलोक के लिए चली गई.
शिक्षा : किसी महापुरुष ने सही कहा है - "किसी के काम में टांग नहीं अड़ानी चाहिए वरना आप जैसा करोगे वैसा ही कुदरत आपके साथ करेगी."
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