यादव अहीर जाति की उत्पत्ति एवं इतिहास | Yadav / Ahir History in Hindi


Yadav / Ahir History in Hindi (यादव अहीर जाति की उत्पत्ति एवं इतिहास) : हेलो दोस्तो! आज इस लेख के माध्यम से हम आपके साथ "Yadav / Ahir History" शेयर करने वाले हैं। आप सभी को पता होगा कि वर्तमान समय में "यादव अहीर (Yadav / Ahir)" जाति के लोगों को समाज में सम्मान की नजरों से देखा जाता है, इस सम्मान का एकमात्र कारण यादव समाज के लोगों का गौरवाविंत कर देने वाला इतिहास है। इसीलिए आज इस लेख के माध्यम से हम "यादव समाज के उस इतिहास" का जिक्र करने वाले हैं, उम्मीद करते हैं यह लेख आपके लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।

यादव अहीर जाति की उत्पत्ति एवं इतिहास - Yadav / Ahir History in Hindi

Yadav History in Hindi

यादव जाति की उत्पत्ति के विषय में इतिहास के महान राजा "यदु" (यदुवंश) का नाम लिया जाता है। कई इतिहासकारों के अनुसार "यदुवंश" के लोग ही यादव जाति के पूर्वज थे। यादव वंश मुख्यत आभीर (वर्तमान अहीर), अंधक, व्रष्णि तथा सत्वत नामक समुदायों से मिलकर बना है। इतिहास और प्राचीन ग्रंथों में उपलब्ध कहानियों के अनुसार यादव जाति के लोग भगवान कृष्ण के उपासक थे।

कुछ इतिहासकारों और कट्टर जातकों के अनुसार भगवान कृष्ण को यादव अहीर जाति का वंशज माना जाता है, लेकिन इस बात का प्रमाण किसी के पास उपलब्ध नहीं है। यादव जाति हिंदू एवं सिख धर्म में विभाजित है, इस जाति के लोग मुख्यतः भारत एवं नेपाल में पाए जाते हैं। भारत में इनकी संख्या काफी बड़ी मात्रा में पाई जाती है, जो कि मुख्यत: उत्तर भारत, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, तमिलनाडु आदि राज्यों में पाए जाते हैं।

यादव (अहीर) व्यवहार एवं दिनचर्या

यादव जाति को क्षत्रिय समुदाय में गिना जाता है, इतिहास की दृष्टि से इस जाति के लोगों का दबदबा रहा है। अहीर जाति की बहादुरी और वीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है, कि जब 1962 में भारत और चीन का युद्ध हुआ था, उस युद्ध के दौरान 13 कुमाऊँ रेजीमेंट को अहीर कंपनी के द्वारा रेजंगल का मोर्चा संभालने का दायित्व दिया गया था।

इस मोर्चे के दौरान अहीर सैनिकों ने जो पराक्रम और वीरता का प्रदर्शन किया, वह अद्भुत और अकल्पनीय था। यादव सैनिकों का पराक्रम और बलिदान लोगों को आज तक याद है, उनके इस बलिदान को देखते हुए युद्ध बिंदु स्मारक को "अहीर धाम" का नाम दिया गया। वर्तमान समय में भी यादव जाति में दबंग प्रवृत्ति के लोग अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। इस जाति का व्यवहार एवं दिनचर्या गुर्जर और जाट समुदाय के लोगों से मिलता जुलता है।


यादव जाति के शौर्य पुरस्कार विजेता सैनिक

  • ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव, परम वीर चक्र
  • कमांडर बी. बी. यादव, महावीर चक्र
  • लांस नायक चंद्रकेत प्रसाद यादव, वीर चक्र
  • मेजर जय भगवान सिंह यादव, वीर चक्र
  • विंग कमांडर कृष्ण कुमार यादव, वीर चक्र
  • नायक गणेश प्रसाद यादव, वीर चक्र
  • पायनियर महाबीर यादव, शौर्य चक्र(मरणोपरांत)
  • पैराट्रूपर, सूबे सिंह यादव, शौर्य चक्र
  • नायब सूबेदार राम कुमार यादव, शौर्य चक्र(मरणोपरांत)
  • सेप्पर आनंदी यादव, इंजीनियर्स,शौर्य चक्र(मरणोपरांत)
  • नायक गिरधारीलाल यादव, शौर्य चक्र(मरणोपरांत)
  • हरि मोहन सिंह यादव, शौर्य चक्र
  • नायक कौशल यादव, वीर चक्र
  • जगदीश प्रसाद यादव, अशोक चक्र(मरणोपरांत)
  • सुरेश चंद यादव, अशोक चक्र(मरणोपरांत)
  • स्क्वाड्रन लीडर दीपक यादव, कीर्ति चक्र(मरणोपरांत)
  • सूबेदार महावीर सिंह यादव, अशोक चक्र(मरणोपरांत)

यादव जाति की वर्तमान स्थिति

अहीर जाति की वर्तमान स्थिति पहले से बेहतर है, इस जाति के ज्यादातर लोग खेती करते हैं। व्यवसायिक रूप से किसान होने की वजह से इस जाति के लोग गांव एवं देहात इलाकों में रहते हैं। इस जाति के युवा वर्ग का रुझान किसी भी प्रकार की सरकारी नौकरी, भारतीय सैन्य, खेलकूद एवं राजनीति में अधिक है। इस रुझान का प्रतिफल आप भारतीय खेल जगत, भारतीय सैन्य एवं राजनीति में मुलायम सिंह के यादव परिवार के रूप में आसानी से देख सकते हैं।

जातियाँ, उपजातियाँ व कुल गोत्र

यादव' शब्द अनेकों पारंपरिक उपजातियों के समूह से बना है, जैसे कि ' हिन्दी भाषी क्षेत्र' के 'अहीर', महाराष्ट्र के 'गवली', आंध्र प्रदेश व कर्नाटक के 'गोल्ला', तथा तमिलनाडू के 'कोनार' तथा केरल के 'मनियार'। हिन्दी भाषी क्षेत्रों में अहीर,ग्वाला (गवली) तथा यादव शब्द प्रायः एक दूसरे के पर्याय माने जाते हैं । कुछ वर्तमान राजपूत वंश भी स्वयं के यादव होने का दावा करते हैं, तथा वर्तमान यादव भी स्वयं को क्षत्रिय मानते है। यादव मुख्यतः यदुवंशी, नंदवंशी व ग्वालवंशी उपजातीय नामों से जाने जाते है, यादव समुदाय के अंतर्गत 20 से भी अधिक उपजातियाँ सम्मिलित हैं। वे प्रमुखतः ऋषि गोत्र अत्री से है तथा अहीर उपजातियों में अनेकों कुल गोत्र है जिनके आधार पर सगोत्रीय विवाह वर्जित है।


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