अगस्त्य ऋषि का जीवन परिचय | Maharishi Agastya in Hindi


Maharishi Agastya in Hindi (महर्षि अगस्त्य / अगस्त्य ऋषि) : भारत हमेशा से तपोभूमि रही है. इस धरती पर अनेकों महापुरुष एवं ऋषि मुनियों ने जन्म लिया. इन्हीं महापुरुषों में से अगस्त्य ऋषि भी एक थे. अगस्त्य ऋषि के बारे में भगवत गीता में उल्लेख मिलता है. शास्त्रों और प्राचीन कथाओं के अनुसार अगस्त्य ऋषि को समुद्र पीने के लिए जाना जाता है. प्राचीन कथाओं में इस बात का विशेष रूप से वर्णन मिलता है. महर्षि अगस्त्य ने हिंदू धर्म का प्रचार प्रसार पश्चिमी देशों में बहुतायत में और सबसे पहले किया था. वे एक शिव भक्त थे. आज हम इस लेख के माध्यम से Maharishi Agastya के बारे में विस्तार से जानेंगे.


अगस्त्य ऋषि का जीवन परिचय - Maharishi Agastya in Hindi

Maharishi Agastya

महर्षि अगस्त्य का जन्म वाराणसी में हुआ था. उनके जन्म तिथि का निर्णय अभी तक नहीं हो पाया है. क्योंकि इस विषय में कोई महत्वपूर्ण सबूत नहीं है. महर्षि अगस्त्य भगवान शिव के अनुयाई  थे और काशी विश्वनाथ के मंदिर में पूजा पाठ किया करते थे. इनके जीवन का लक्ष्य धर्म प्रचार करना था. शिव भक्त होने की वजह से धर्म प्रचार के लिए महा ऋषि अगस्त्य दक्षिण भारत चले गए. उस दौर में किसी ने विध्यांचल (विशालकाय जंगलों) को पार कर दक्षिण जाने का साहस नहीं किया था.

अगर आपको नहीं पता है तो हम आपको बता दें, विद्यांचल का दक्षिणी भाग घने जंगलों से भरा पड़ा था. महर्षि अगस्त्य ने अपने परिश्रम तथा ज्ञान के बल पर स्थानीय लोगों को शिष्य बनाकर उनकी सहायता से जंगल को कटवाया. यहां पर उन्होंने नगर तथा आश्रमों की स्थापना की, यहां के निवासियों को कला-कौशल वह हर एक तरह की शिक्षा दी. वे हमेशा भगवान शिव के प्रचार प्रसार में लगे रहे. पांडु देश के राजा इन्हें देवता की भांति पूछने लगे थे.


 महर्षि अगस्त्य ने यर्जुवेद का प्रचार किया, भाषाओं का संस्कार किया तथा मूर्ति कला का ज्ञान दिया. यहां धर्म कला संस्कृति भाषा आदि का सशक्त प्रचार एवं स्थापना करने के बाद महर्षि अगस्त्य भारत से बाहर निकले. भारत के बाहर महर्षि अगस्त्य समुद्री यात्रा करते हुए अनेकों देशों में हिंदू धर्म के प्रचार प्रसार के लिए जा पहुंचे. महर्षि अगस्त्य ने इन देशों में  हिंदू धर्म एवं संस्कृति का प्रचार किया. इन्होंने समुद्री यात्राओं में महारत हासिल कर ली थी, इसीलिए लोग कहते हैं. कि महर्षि अगस्त्य समुंद्र पी गए थे.

 कंबोडिया के शिलालेखों के अनुसार ब्राह्मण अगस्त्य आर्य देश के निवासी थे. वे शिव भक्त एवं हिंदू धर्म के अनुयाई थे. उनकी अलौकिक शक्ति एवं उनके मुख का तेज देखने योग्य था. बताया जाता है कि उसी के प्रभाव से वे देश देश तक पहुंच सके. कंबोडिया आकर उन्होंने भदेश्वर नामक शिवलिंग की पूजा अर्चना लंबे समय तक की. कंबोडिया में रहते हुए उनकी मृत्यु हो गई.

कहा जाता है कि महर्षि अगस्त्य कंबोडिया देश के आगे भी गये थे. तथा आसपास के देशों में भारतीय संस्कृति का प्रकाश फैलाया था. महर्षि अगस्त्य भारत से बाहर सिन्ध एवं पश्चिमी देशों तक जाकर भारतीय संस्कृति एवं धर्म का प्रचार करने वाले लोगो में प्रथम व्यक्ति थे.
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