एलोवेरा की खेती कैसे करें | Aloevera Ki Kheti / Farming Kaise Kare


Aloevera Ki Kheti / Farming Kaise Kare in Hindi / एलोवेरा की खेती कैसे करें : हेलो दोस्तो, आज के इस लेख में हम आपको "एलोवेरा की खेती" के बारे में विस्तार से बताएंगे. Aloevera Ki Kheti किसान भाइयों के लिए वरदान साबित हो सकती है, क्योंकि वर्तमान समय में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एलोवेरा (ग्वारपाठा, घृतकुमारी) की बेहद डिमांड है. एलोवेरा का इस्तेमाल दवाईयाँ, स्किन प्रोडक्ट, कॉस्मेटिक प्रोडक्ट, एलोवेरा जूस एवं अच्छे स्वास्थ्य के लिए किया जा रहा है.

 एलोवेरा के बढ़ते इस्तेमाल के कारण मार्केट में इसकी बेहद डिमांड है. एलोवेरा की बढ़ती डिमांड का फायदा उठाते हुए, किसान "एलोवेरा की खेती" करके अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.  राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश एवं उत्तर भारत के किसान एलोवेरा की खेती करके अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. यह मुनाफा 1 एकड़ में 1.5 - 2.5 लाख रुपए सालाना हो सकता है. आज इस लेख में हम आपको बताएंगे कि 'एलोवेरा की खेती' आप किस प्रकार कर सकते हैं.


एलोवेरा की खेती कैसे करें - Aloevera Ki Kheti Kaise Kare


एलोवेरा की खेती करने के लिए आप को सही जानकारी होना बहुत जरूरी है. इस लेख में हम आपको - "एलोवेरा की खेती के लिए सही जलवायु,
 मौसम, सही मिट्टी का चुनाव, उर्वरकों का उपयोग, अच्छी नस्ल के पौधों का चुनाव, एलोवेरा के पौधे लगाने का तरीका, पहली फसल लेने का समय, देखभाल एवं फसल को कहां बेचे". इन सब विषयों पर हम संक्षिप्त में प्रकाश डालेंगे.

जलवायु एवं मिट्टी का चुनाव

एलोवेरा की खेती करने के लिए आपको सही जलवायु एवं मिट्टी के बारे में जानकारी का होना बहुत जरूरी है. एलोवेरा की खेती के लिए गर्म जलवायु सबसे बेहतर रहती है. एलोवेरा के पौधे की रोपाई के लिए "अप्रैल-मई" का महीना सबसे अनुकूल माना जाता है. एलोवेरा का पौधा गर्म में जलवायु में जल्दी फलता-फूलता है.

 अगर हम एलोवेरा की खेती के लिए अच्छी मिट्टी की बात करें, तो दोमट मिट्टी और रेतीली मिट्टी एलोवेरा के पौधे के लिए सबसे उत्तम रहती है. आजकल राजस्थान जैसे गर्म क्षेत्र में एलोवेरा की खेती काफी फल-फूल रही है. राजस्थान के अलावा एलोवेरा की खेती उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड, बंगाल आदि गर्म इलाकों में आसानी से कर सकते हैं.


सही एलोवेरा के पौधे (ब्रीड) का चयन


एलोवेरा की खेती करने के लिए सही पौधे एवं वैरायटी का चयन बहुत जरूरी है. एलोवेरा का पूरा व्यवसाय एलोवेरा के पौधे की सही वैरायटी पर निर्भर होता है. यदि आप सही नस्ल के पौधे का चुनाव नहीं करते हैं, तो आप को भारी नुकसान भी उठाना पड़ सकता है. एलोवेरा की खेती के लिए मार्केट में विभिन्न प्रकार की हाइब्रिड वैरायटी उपलब्ध है. एलोवेरा के पौधे की एक अच्छी वैरायटी का पौधा होने के कई फायदे निम्नलिखित है.

● हाइब्रिड एलोवेरा की फसल जल्दी तैयार होती है.
● रोग एवं कीट पतंगों का प्रकोप कम होता है.
● हाइब्रिड एलोवेरा की पत्तियां ज्यादा वजनदार होती हैं.
● हाइब्रिड एलोवेरा का उपयोग ज्यादातर दवाइयों मैं होता है, इस कारण मार्केट में इसकी डिमांड ज्यादा रहती है.
● हाइब्रिड एलोवेरा का पौधा लंबे समय तक चलता है, जिसके कारण किसान को लंबे समय तक फायदा मिलता है.


वर्तमान समय में भारतीय बाजार की बात करें तो एलोवेरा की 2 नस्ल सबसे ज्यादा उगाई जा रही हैं. इन नस्ल के एलोवेरा की डिमांड भारतीय बाजार में सबसे ज्यादा है. दरअसल इन नस्ल के एलोवेरा का इस्तेमाल दवाइयों एवं ब्यूटी प्रोडक्ट में सबसे ज्यादा किया जा रहा है इसी कारण मार्केट में इन नस्ल के एलोवेरा का बोलबाला है. यह एलोवेरा की वेराइटी नीचे निम्नलिखित है :-

IEC 111269
● IEC 111271

यदि आप भी एलोवेरा की खेती करने के इच्छुक हैं तो हो सके तो आप इसी ब्रीड का उपयोग करें. यह ब्रीड आपको अच्छा मुनाफा कमा कर देती है. यदि आप इस ब्रीड का उपयोग करते हैं तो आप 2 एकड़ भूमि में 35 - 36 टन एलोवेरा का उत्पादन कर सकते हैं.

एलोवेरा की सही वैरायटी (ब्रीड) का पौधा कहां से लें?

एलोवेरा की खेती के लिए सही वैराइटी का चुनाव करें. आजकल मार्केट में फ्रॉड सप्लायर घूम रहे हैं, जो आप को महंगे दामों पर गलत वैरायटी (ब्रीड) का पौधा दे देते हैं. जिसकी वजह से आपको हानि उठानी पड़ती है. ऐसी स्थिति में आप एलोवेरा के पौधे खरीदते समय सावधानी बरतें और जहां तक हो सके 'स्थानीय सरकारी नर्सरी' से एलोवेरा के पौधे खरीदें.

 इसके अलावा यदि आपका कोई भरोसेमंद डीलर या जानकार व्यक्ति है, जो एलोवेरा की खेती या व्यापार से जुड़ा हो तो आप उससे पौधे आप खरीद सकते हैं. यदि आप उच्च गुणवत्ता कि पौधे खरीदना चाहते हैं, या फिर जानकारी चाहते हैं. तो आप अपने जिले के कृषि कल्याण विभाग से संपर्क करें. आप वहां से एलोवेरा की खेती के बारे में हर संभव जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. इसके अलावा आप 'किसान कॉल सेंटर' (1800 180 1551) पर कॉल करके सहायता एवं जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.

एलोवेरा की खेती के लिए भूमि तैयार कैसे करें?

वर्तमान समय में एलोवेरा की खेती किसान के लिए सबसे अच्छी खेती साबित हो रही है. एलोवेरा की खेती ज्यादा मुनाफे के साथ-साथ किसानों की जेब को कम प्रभावित करती है. इसीलिए आप एलोवेरा की खेती करके अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. एलोवेरा की खेती मैं बाकी फसलों के मुकाबले कम फर्टिलाइजर, कम दवाएं एवं कम पानी की जरूरत होती है. जिससे किसान को काफी हद तक राहत मिलती है.

 एलोवेरा की फसल रोपाई से पहले खेत को तैयार करना होता है. खेत तैयार करने के लिए आपको सबसे पहले गोबर खाद खेत में डालना पड़ता है. आप गोबर खाद को 12 से 15 टन प्रति एकड़ के हिसाब से डाल सकते हैं. गोबर खाद डालने के बाद आप खेत की जुताई करें, ताकि गोबर खाद खेत में अच्छे से मिल जाए. अब आगे आप खेत में क्यारियां बनाकर खेत की सिंचाई करें. सिंचाई करने के बाद जब तक खेत जुताई के लायक हल्का सूखा ना हो जाए, तब तक इंतजार करें.

जैसे ही खेत जोतने के लायक बन जाए, आप उसकी तीन से चार बार जुताई करें. अब आप का खेत एलोवेरा के पौधे रोपण के लिए तैयार है. यदि आपके क्षेत्र में बारिश अधिक होती है या फिर चिकनी मिट्टी है. तो आलू के जैसी क्यारियों पर एलोवेरा का पौधारोपण करें. ऐसा करने से अधिक बारिश होने के बाद भी एलोवेरा के पौधे को किसी प्रकार की हानि नहीं पहुंचती है.

एलोवेरा की कटाई

एलोवेरा की पत्तियों की प्रथम कटाई आप 8 माह के बाद कर सकते हैं. इसके बाद आप हर 6 महीने के बाद एलोवेरा की पत्तियों की कटाई कर पाएंगे. प्रथम कटाई के दौरान आप एक एकड़ से 12-15 टन पत्तियों का उत्पादन कर सकते हैं. इसके बाद आप हर 6 महीने के बाद 15-17 टन प्रति एकड़ की दर के हिसाब से पत्तियों का उत्पादन कर सकते हैं. एलोवेरा की पत्तियों को काटते समय सावधानी बरतें.

एलोवेरा की पत्तियों को काटते समय केवल बड़ी पत्तियों को ही काटे, क्योंकि अगली 6 महीने की फसल प्राप्त करने के लिए एलोवेरा के पेड़ का सुरक्षित रहना बहुत जरूरी है. एलोवेरा की खेती करने का एक फायदा यह भी है, कि आप 2 से 5 साल तक लगातार फसल प्राप्त कर सकते हैं. इसके लिए आपको हर बार पौधारोपण करने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

एलोवेरा की खेती से होने वाले लाभ


यदि आपको लगता है कि आप एलोवेरा की खेती कर सकते हैं और इस लेख में बताया गया वातावरण आपके अनुकूल है. तो आप एलोवेरा की खेती से अच्छा लाभ कमा सकते हैं. यदि आप अच्छे से 2 एकड़ में एलोवेरा के पौधे लगाते हैं. तो हर 6 महीने मैं आप 20 से 25 टन पत्तियों का उत्पादन कर पाएंगे. भारतीय बाजार में एलोवेरा की पत्तियां 15 से 25 हजार रुपये प्रति टन के हिसाब से बिकती है.

 एलोवेरा की पत्तियां बेचकर आप 2.5 लाख से 3 लाख रुपए प्रतिवर्ष आसानी से कमा सकेंगे. इसके अलावा आप 2 वर्ष बाद पौधे के नीचे उगी छोटी पौध को भी बेच सकेंगे. एलोवेरा की पौध बेचकर आप सालाना 2 लाख रुपए प्रति वर्ष आसानी से कमा पाएंगे. इसी प्रकार आप एलोवेरा की खेती करके सालाना कमाई 4 से 5 लाख रुपए आसानी से कमा पाएंगे. यदि हम खर्चे की बात करें, तो आपका 50 से 60 हजार रुपए शुरुआती समय में खर्च आएगा, यदि आपके पास जमीन आपकी स्वयं की है.

एलोवेरा की पत्तियां कहां बेचे?

यदि आप एलोवेरा की खेती कर रहे हैं, तो एलोवेरा की पत्तियां बेचने के लिए आप पतंजलि, डाबर एवं अन्य कॉस्मेटिक प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनियों को टारगेट कर सकते हैं. इसके लिए आप उन कंपनियों की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर उन के ईमेल के द्वारा आप हमसे संपर्क कर सकते हैं.

यदि आप एलोवेरा की खेती छोटे स्तर पर कर रहे हैं, तो आप मार्केट में एलोवेरा के जूस बेचने वालों से डील कर सकते हैं. या फिर आप स्वयं एलोवेरा जूस निकालकर बेच सकते हैं. यदि आप स्वयं एलोवेरा जूस बेचते हैं, तो आप का मुनाफा दोगुना भी हो सकता है.

यदि आप एलोवेरा की पत्तियों को खेत पर से डायरेक्ट बेचना चाहते हैं, तो लोकल मार्केट में एलोवेरा डीलर से संपर्क कर सकते हैं. यदि आप मैं से कोई एलोवेरा डीलर यह पोस्ट पढ़ रहा है. तो कृपया अपना नंबर कमेंट में शेयर करें.

संबंधित प्रोडक्ट (Marchandise)

यदि आप एलोवेरा से संबंधित प्रोडक्ट एवं एलोवेरा का पौधा इत्यादि  एवं अन्य प्रोडक्ट इत्यादि खरीदने में रुचि रखते हैं, तो नीचे दिए गए लिंक के माध्यम से सभी प्रोडक्ट को देखकर अपनी सहूलियत के हिसाब से खरीद सकते हैं। नीचे दिए गए लिंक से आप कोई भी प्रोडक्ट खरीदते हैं, तो आपको Best Deal और अच्छा डिस्काउंट मिल जाएगा।  संबंधित प्रोडक्ट की एक झलक आप नीचे दिये गए फोटो में देख सकते हैं।

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