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कबीर दास के दोहे अर्थ सहित | Kabir das Ke Dohe in Hindi

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Kabir das Ke Dohe in Hindi / कबीर दास के दोहे हिंदी में अर्थ सहित : दोस्तों आज हम आपको 'Kabir Ke Dohe' हिंदी में अर्थ सहित बताएंगे. यदि आपको नहीं पता कि कबीरदास कौन है? तो हम आपको बता दें कि कबीर दास इतिहास के एक महान संत हैं. कबीरदास अपने दोहों की वजह से आज भी याद किए जाते हैं. कबीर दास के दोहे में संक्षिप्त संदेश छुपा होता है. जिसको आज हम आपको अर्थ सहित हिंदी में बताएंगे. यदि आप "Kabir das Ke Dohe" का अर्थ जानना चाहते हैं, तो आपको यह लेख पसंद आएगा.
Kabir das Ke Dohe in Hindi - कबीर के दोहे अर्थ सहितदोहा (Doha) -

शीलवंत सबसे बड़ा, सब रत्नन की खान।
 तीन लोक की संपदा, रही शील में आन।।

अर्थ - इस दोहे के माध्यम से कबीर दास जी कहते हैं कि- "शीलवान एवं संतुष्टि का गुण दुनिया के सभी गुणों में श्रेष्ठ है. शीलवान लोग  रत्नों के मुकाबले में अच्छे माने जाते हैं. जिस व्यक्ति के अंदर शालीनता का निवास रहता है वह दुनिया का सबसे सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति कहलाने के लायक है."

दोहा (Doha) -

साईं इतना दीजिए, जामे कुटुम समाय।
मैं भी भूखा ना रहूं, साधु भी भूखा ना जाए।।

अर्थ - इस दोहे में कब…